कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में दिए गए एक बयान ने भाजपा नेताओं में तीखी प्रतिक्रिया पैदा की है। राहुल गांधी ने एक जनसभा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों और कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए उन्हें “जुमलों का व्यापारी” करार दिया, जिसके बाद भाजपा नेताओं ने इसे “असभ्य और असंसदीय” भाषा बताया। इस टिप्पणी के तुरंत बाद भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं ने राहुल गांधी के खिलाफ जोरदार प्रतिवाद किया और कांग्रेस पार्टी पर “राजनीतिक संस्कृति को दूषित करने” का आरोप लगाया।
भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने इस बयान को “निराशा से उपजी हताशा” बताते हुए कहा कि राहुल गांधी लगातार प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ व्यक्तिगत टिप्पणियों के माध्यम से राजनीतिक बहस का स्तर गिरा रहे हैं। वहीं, केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने राहुल गांधी से अपने “अनर्गल और अतार्किक” बयानों पर विचार करने की अपील की। इस पूरे विवाद ने संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान राजनीतिक गर्मी बढ़ा दी है, जहाँ भाजपा सांसदों ने राहुल गांधी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद आगामी चुनावों को देखते हुए दोनों दलों के बीच बढ़ती राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का संकेत है। कांग्रेस पार्टी ने राहुल गांधी के बयान का बचाव करते हुए इसे “सरकार की नीतियों के खिलाफ जायज सवाल” बताया है, जबकि भाजपा नेता इसे “व्यक्तिगत हमला” मानते हैं। इस बहस ने एक बार फिर राजनीति में भाषा के इस्तेमाल और संसदीय शालीनता के मानकों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
